Class 8th Pol-Science Chapter 1 ( भारतीय संविधान ) Notes in Hindi

Class 8th Pol-Science Chapter 1 ( भारतीय संविधान ) Notes in Hindi. यह दस्तावेज उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी

  अध्याय-1. भारतीय  संविधान

 

संविधान -उद्देश्य

  • यह दस्तावेज उन आदर्शों को सूत्रबद्ध करता है जिनके आधार पर नागरिक अपने देश को अपनी इच्छा और सपनों के अनुसार रच सकते हैं।
  •  संविधान ही हमारे समाज का मूलभूत स्वरूप बताता है।
  • संविधान नियममे का एक ऐसा समूह हैता है जिसको एक देश के सभी लोग अपने देश को चलाने की पद्धति के रूप में अपना सकते है।

  • इसके जरिए सरकार किस तरीके की होगी यह तय हो सकता है और उन आदर्शों पर भी एक साझी समय विकसित होता है जिससे पूरे देश की रक्षा कि जा सकती है।

(2).संविधान देश की राजनीतिक व्यवस्था को तय करता है। जिन देशो में लोकतांत्रिक शासन पद्धति या राज व्यवस्था होती है वहाँ निर्णय प्रक्रिया के नियम तय करने से संविधान अहम भूमिका अदा करता है।

•. लोकतांत्रिक समाज में.. संविधान ही ऐसे नियम तय जिनके द्वारा राजनेताओं के हाथो सत्ता के इस दुरुपयोग को रोका जा सकता है। भारतीय संविधान में ऐसे बहुत सारे कानून मौलिक अधिकारी वाले खण्ड में दिए गए है

EX- समानता का अधिकार

समानता का अधिकार

समानता का अधिकार = अनु-14-18

धर्म, नस्ल, जाति, लिंग और जन्मस्थान

-के आधार पर देश के किसी भी नागरिक के साथ मैद‌भाव नहीं किया जा सकता

- यह एक मौलिक अधिकार है।

  • अल्पसंख्यको पर बहुसंख्यकों की इस निरंकुशता या दबदबे पर प्रतिबंध लगाना भी संविधान का महत्वपूर्ण कार्य है।

अंतर सामुदायिक  वर्चस्व (Inter Community) एक समुदाय द्वारा दुसरे समुदाय के ऊपर दबाव।

Intra-Community) एक ही समुदाय के भीतर कुछ लोग अता सामुदायिक दुसरे को दबा सकते है,

(3).संविधान हमे ऐसे फैसले लेने से भी रोकता है जिनसे उन बड़े सिद्धांतो को ठेस पहुंच सकती है जिनमें देश आस्था रखता है।

1904 में भारतीय राष्ट्रीय कांगतेस ने संविधान सभा के गठन की माँग को पन्छ पहली चार अधिकृत नीति में शामिल

  • Dec 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया
  •  1946 Nov 1949 के बीच संविधान नया प्रारूप तैयार किया गया। 

नेपाल में लोकतंत्र

नेपाल में लोकतंत्र के लिए कई जनसंघर्ष हुए।

  • 1990 में हुए संघर्ष के बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई यह लोक्ताविक व्यवस्था 2002 तक 12 सालो तक कायम रही।
  • Octo 2002 में राजा ज्ञानेन्द्र ने गौतों में माओवादी संगठनो के बढ़ते प्रभाव का बहाना बनाकर सेना की मदद से सरकार के विभिन्न कामो को सपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया।

③ Feb 2005 में राजा ने शासन की बागडोर पूरी तरह अपने हाथों में ले लो

④ Nov 2005 में माओवादियों ने अन्य राजनीतिक दलों के साथ एक 12 सूत्री समझौते पर दस्तखत किए। इस समझौते में जाम लोगो को लोकतंत्र और अमन चैन बहाल होने की उम्मीद दिखाई दे रही थी।

⑤ लोकतंत्र के लिए चल रहा यह आन्दोलन 2006 तक अपने शिखर पर पहुंच चुका था। आन्दोलनकारियों ने राजा को ओर से दी बाई छोटी मोटी रियायतो को नामंजूर कर दिया और आखिरकार April 2006 में राजा को तृतीय संसद बहाल करके राजनीतिक दलों को सरकार बनाने का मौका देना पड़ा

⑥ 2008 में राजतंत्र को खत्म करने के बाद नेपाल लोकतंत्र बना

नेपाल में नया संविधान

① 1990 में बना नेपाल का विहला संविधान इस सिद्धांत पर आधारित था कि शासन की सर्वोच्य सत्ता राजा के पास रहेगी। नेपाल के लोग लेकतंत्र के रास्ते पर चलना चाहते थे। और इसके लिए उन्हें एक नए संविधान चाहिए था।

② पिछले संविधान इसलिए नहीं अपनाना चाहते थे क्यो कि उसमे वे आदरी नहीं थे जो वे नेपाल के लिए चाहते थे और जिनके लिए वे लड़ रहे थे।

③ नेपाल का पुराना संविधान में कहा गया था कि देश के शासन की भागडोर  राजा और मंत्रि परिषद् के हाथ में रहेगी

④ यही कारण है कि नेपाल के लोगों ने 2015 में अपने देश के लिए एक नया संविधान अपनाया

(भारतीय संविधान के मुख्म लक्षण )

① संघवाद - भारतीय संविधान से संघवाद का लवण दिखाई देता है इसका मतलब है देश में एक से ज्यादा स्तर की सरकारी होना। । भारत में राज्य राज्य व केन्द्र दोनो स्तर पर कर स पंचायती व्यवस्था एक तीसरा स्तर भी है।

संसदीय शासन पद्धति

सरकार के सभी स्तरों का प्रतिनिधियों का चुनाव लोग खुद करते है। भारत का

संविधान अपने सभी व्यस्क नागरिको को वोट डालने का अधिकार देता है।

शक्तियों का बंटवारा .संविधान के अनुसार सरकार के तीन अंग है-

विद्यायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका । विधायिका में हमारे निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। कार्यपालिका ऐसे लोगों का समूह है जो कानून को लागू करने और शासन चलाने का काम देखते हैं। न्यायालयों कि व्यवस्था को न्यायपालिका कहा जाता है

 ④ मौलिक अधिकार - स्वतंत्र भारत में राज्य की सत्ता के दुरुपयोग से बचाव के लिए कुछ मौलिक अधिकार है।

इस तरह संविधान राज्य और अन्य व्यक्तियों के समक्ष शक्तियों के अधिकारों की रक्षा भी करता है।

मौलिक अधिकार के अलाता नीति निर्देशक तत्वों की भी सामाजिक व आर्थिक सुधार लाने के लिए जोड़ा गया है।

⑤ धर्मनिरपेक्षता -धर्मनिरपेक्ष राज्य तह होता है जिसमें राज्य अधिकृत रूप से किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में बढ़ावा नहीं देता

(भारतीय संविधान लिखने में भाई चुनौतियाँ)

भारतीय संविधान को लिखने में लगभग 300 लोगो ने योगदान दिया जो 1946 में गठित की गई संविधान सभा के सदस्य थे। भावी संविधान के निर्माण के लिए अगले तीन साल तक संविधान सभा की बैठक होती रहीं।

2) संविधान सभा के इन सदस्यों के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी थी की देश में कई समुदाय थे। उनकी न ती भाषा एक थी; न एक धर्म था और न ही एक जैसी संस्कृति थी।

② संविधान जब लिखा जा रहा था उस समय देश में भारी उथल घुष्टल की थी। भारत पाकिस्तान का बरवारा लगभग तय हो चुका था. कुछ रियासते तय नहीं कर पा रही थी कि उनका भविष्य क्या होगा, वे किधर जाएँगी। जनता की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भयानक थी।